मनुवाद
जन उदय : विचार यानी सोच एक बहुत बड़ी शक्ति होती है हम जैसा सोचते है वैसे ही बन जाते है जैसे जैसे हमारे विचार परिपक्व होते जाते है वैसा ही हमारा व्यक्तित्व बनता जाता है , हम क्या सोचते है क्या पसंद करते है ये सब हमारे व्यक्तित्व का हिसा होते है और मनोविज्ञानिक इन्ही सब बातो से हमारे व्यक्तित्व का अंदाजा लगाते है
अगर हम कहे तो ये पूरी दुनिया हथियारों के दम से नहीं साइंस के दम से नहीं बल्कि विचारों के दम से चल रही है क्योकि हमारे विचार ही सब चीजो को सारे अविष्कारों को जन्म देते है और हमें आगे या पीछे धकेलते है
अगर हम इन विचारों की तीन श्रेणी बनाए तो मूल रूप से हमारे पास सिर्फ तीन तरह की विचारधाराए सामने आती है पहली विचारधारा के लोग हमेशा समाज को आगे की और ले जाना चाहते है ये लोग समाज में फैली बुराइओ और पुराने दकियानूसी विचारों का त्याग करते है और हमेशा नए विचारों का स्वागत करते है
दुसरे लोग ऐसे होते है जो समाज में परिवर्तन तो चाहते है लेकिन समाज को हमेशा वैसा ही बनाए रखना चाहते है थोड़ा बहुत सामाजिक परिवर्तन इनके लिए हमेशा स्वीकार्य होता है तीसरा वचार वह होता है जो समाज को अमेशा पीछे की और धकेलता है वह कहता है की हमारा अतीत ही अच्छा था और हमे वैसा ही बनना चाहिए इस विचारधारा के मानने वाले लोग हमारे देश में संघी भाजपा और अन्य दक्षिण पंथी लोग है जो समाज को हमेशा पीछे आदिकाल में धकेल रही है
पहले लोग हम वामपंथी को कह सकते है और दुसरे कांग्रेस के लोग हम कह सकते है
हम इन विचारों के आधार पर ही कह सकते है की कुछ लो आज से दो सौ साल आगे जी रहे है और कुछ आज से पांच हजार साल पीछे जी रहे है
ये पांच हजार साल पहले वाले लोग भाजपा , संघी मनुवादी जो समाज में किसी तरह की समानता नहीं आने देना चाहते ये किसी ने किसी बहाने समाज को हमेशा रुदिवादी बनाना चाहते है लडकिया घर से बाहर नहीं जा सकती लडकिया पढ़ नहीं सकती , औरतो को सम्पति , घन का कोई अधिकार नहीं ये सिर्फ भोग की वास्तु है इन्हें हमेशा गुलाम बना कर रखना चाहिए इस तरह की बाते कौन कर सकता है ?/ शायद किसी जीते जागते स्वस्थ मानसिकता वाले इंसान से तो यह अपेक्षित नहीं है , यानी ये लोग खुद भी विक्षिप्त है और समाज को अशिक्षा , अंधविश्वास , असमानता शोषण तक ले जाना चाहते है
अब अगर हम बात करे की क्या कोई औरत इस तरह की दमनकारी विचारधारा का समर्थन कर सकती है
एक स्वास्थ मानसिकता वाले इंसान की नजर शायद कभी नहीं , एक औरत की जीत सिर्फ उसी तरह के विचारों से है जो उसे मुक्ति दे लेकिन बावजूद इसके कुछ महिलाए है जो ऐसी दमन कारी कुचक्र्कारी का न सिर्फ समर्थन करती है बल्कि हर समय उनको फैलाती है तो कोई ये बताये ये औरते कौन हो सकती है जो आधी आबादी को गुलाम बना कर रखने में विशवास रखती है ?? ये तो वही हो सकती है जो इस विचारधारा की खुद गुलाम है और इस विचारधारा को फैलाने के लिए वेश्यावृति कर रही है , मनुवादी विचारधारा को फैलाने के लिए एक जाति के लोग जो विदेशी
आक्रमणकारी है इन्होने औरतो को अपना हथियार बनाया हुआ है इन औरतो ने इन जाति के लोगो के लिए न सिर्फ वेश्यावृति की है बल्कि भारत के मूल निवासी राजाओं की हत्या करने तक के लिए इस्तेमाल किया है ये बात अलग है की इन मनुवाडियो ने कहने को तो इन औरतो को देवी का दर्जा दिया लेकिन क्या सचमुच ये देवी हो गई है ????
ये मनुवादी और मनु की सन्तान वो लोग है जो अपनी बहन बेटियो को हमेशा हथियार बना कर इस्तेमाल करते आये है लेकिन ये बात खुद इन महिलाओं को सोचना है की ये इन चुटियाधारी मनुवादियो के लिए इसी तरह की वैचारिक वेश्यावृति करना चाहती है या अपनी आधी आबादी के लिए मुक्त विचारधारा चाहती है
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